चाँदनी रात में तुम
ओस में भीगती हुई,
सफेद लिबास में
सबनम की बूँद सी
जब क्यारी में
तितलियों के बीच
लहराती हो,
चंचल हिरनी सी
बलखाती हो-
मैं पलक
झपकाना भूल जाता हूँ,
चुपके से पेड़ के पीछे
छुप कर निहारता रहता हूँ,
न जाने कितने
बातें होठों पर
आते आते रहजाते हैं,
मन में तुम्हारे
सामने आने की
चाह, फिरभी चुप हो जाता हूँ,
डर लगता है,
कहीं सामने तुम्हारे आते ही
नींद न खुल जाए,
पल में ये सपना
टूट न जाए,
मुठ्ठी को बंद कर
सीने में थाम लेता हूँ,
लगता यूँ तुम मेरे करीब हो
बहूत ही करीब.
© लता तेजेश्वर
(on: Fri Feb 28 03:49:59 PST 2014)
.....लता तेज......*******
ओस में भीगती हुई,
सफेद लिबास में
सबनम की बूँद सी
जब क्यारी में
तितलियों के बीच
लहराती हो,
चंचल हिरनी सी
बलखाती हो-
मैं पलक
झपकाना भूल जाता हूँ,
चुपके से पेड़ के पीछे
छुप कर निहारता रहता हूँ,
न जाने कितने
बातें होठों पर
आते आते रहजाते हैं,
मन में तुम्हारे
सामने आने की
चाह, फिरभी चुप हो जाता हूँ,
डर लगता है,
कहीं सामने तुम्हारे आते ही
नींद न खुल जाए,
पल में ये सपना
टूट न जाए,
मुठ्ठी को बंद कर
सीने में थाम लेता हूँ,
लगता यूँ तुम मेरे करीब हो
बहूत ही करीब.
© लता तेजेश्वर
(on: Fri Feb 28 03:49:59 PST 2014)
.....लता तेज......*******