किसान की बेटी अब देश की बेटी कहलाई
अपना वजूद को देश विदेश भर में बतलाई।
देख हिमा दास को हिम भी आज पिघल रहा
कहो इस कली को किस आँगन ने खिलाया।
जूते न थे पैर में जब धरती मुलायम बन गई
तकलुफ्फ में है दुनिया जो बेटी को फेंक आई।
नाज़ है तुम पर हिमा रोशनी इतना फैलाओ
कोई न कहे कि बेटी को क्यों रे! मेरे घर आई।
©लता तेजेस्वर 'रेणुका'
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