यूँ तो तुम मेरे ख्यालों में
बसी हो सदा।
हर धडकन, हर पहलू में
सजी हो, दिल की धड़कन से
रह रह कर जब आवाज आती है,
बेशक् बेवजह याद तुम्हारी आती है।
मन ही मन मुस्काती हुई
मैं, न जाने क्या क्या
कह जाती हूँ तुम से -
एक पल में तुम मेरे चारों ओर
गुन गुनाते रहते हो,
दुसरे ही पल में मुझसे दूर
कहीं गायब हो जाते हो।
अक्सर - मेरे चारों तरफ
ढ़ूँढ़ती हूँ तुम्हें।
कैसे कहें की कितनी तमन्नाएँ
दिल में सजाए रखे हैं।
जिस पल चाहा था तुम्हें -
उस पल की आगाज़ अब भी है,
आशमान की उंचाई पर
चाँद जब भी मुस्कुराती है,
तुम ही तुम नजर आते हो.
यूँ तो मेरे ख्यालों में बसी हो
न कभी दूर जाते हो
न कभी पास आने का
जिक्र करते हो।
© लता तेजेश्वर
02/02/2014
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