गुरुवार, 13 मार्च 2014

तेरा मेरा रिश्ता कुछ ऐसा था। …


गाँव की गली में वो  हरकतें  थी,
सूरज की लाली में वो नशा भी था -
महकती  हवा में खुशबू का पहरा था

घास की बगिया में सबनम की बुँदे थे,
तेरे होंठों पर मुस्कराहट
और मेरे साँसे बहके हुए थे .

कदम मेरे बहक रहे थे,
चंचल मन सरमा रहा था
दिल की धड़कने उफ्फां पर थी
और साँसे मेरे गरमा रह थे-

कैसे हुए सर्द हवा में ये रंगीन तस्वीरें ?
जो तस्वीर दिल में कभी बसा ही नहीं था,
उस तस्वीर को एक नज़र ही तो देखा था-
और मन में मेरे लाखों सवाल थे
जिनका न था जवाब
न था इंतज़ार .......
बस बेबस सा एक दिल था,
जिसके चारों ओर फूल ही फूल खेल रहे थे
उस फूलों की वादियों में-
एक खिलाता हुआ कमल लहराता था,
जिसकी श्क्ल खाश 
तुझसे मिलता जुलता था।
अचानक ही गायब हो गए सारे सितारे
गायब हो गए फूलों की वह वादियाँ
तन मन में लहराता हुआ एक आवाज़ रहगया,
पुकारते पुकारते थक सा गया 
सुनाने वाला कोई न था,
सिसकता हुआ वह आवाज़ धीरे धीरे 
खोने लगा।
ये तू नहीं था, तेरे चेहरा हँस रहा था,
बार बार तू सपनों में आता रहा,
कुछ बताने को कोशिश करता रहा -
पर पल में गायब हो जाता रहा .
मेरे करीब एक पुकार 
महसूस होता है हर पल -
मगर कोई न था जिसे अपना कह सकूँ,
मन में लाखों सवाल उठते रहते -
कौन है तू ?
कहाँ से आया है तू ?

ये कैसा एहसास है जो मुझे
तेरे करीब खिंच ले आती है,
चाहे जितना दूर जाने को कोशिश करूँ
एक झलक सी नज़र आती है .
कोई पुकारता है हर पल
हाथ बढाता रहता है,
पर न जाने मन में मेरे एक संकोच था -
कतराता रहा मेरा दिल,
तेरी उस स्नेह भरी हाथ को छूने से -

बार बार ये कहता रहा न आया करो 
पास मेरे, गिर पड़ेंगे मेरे आँसू
जो कई दिनों से संभाल रखा था
तेरे जुदाई में …

© Lata Tejeswar

composed on 9/8/2011

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